जन्मभुमी को आबाज || आबाज बिहिनकाे आबाज

नयाँ वर्ष

भरतपुर,  २९  चैत

 

नयाँ  वर्ष

जताततै  त्रास  मात्र  कतै  छैन  आज  हर्ष

शान्त  होला  भन्दाभन्दै,  आएकोछ  नयाँ  वर्ष 

अस्तव्यस्त  कोलाहल्  ,  संसारभरि  सर्वत्र

विश्व  सारा  आक्रान्त  ,  के  मनाउँ  नयाँ  वर्ष  ।।

विदेशमा  नेपालीको,  करुण  क्रन्दन  सुन्दा

जन्मभूमि  जान्छु  भन्दै,  सबले  पुकार  गर्दा 

कोठाभित्र  थुनिएर,  जीवन  जीउनु  पर्दा

किन  आयो  आपतमा,  अहिलेको  नयाँ  वर्ष  ।।

राहतको  आशा  गर्दै,  कतिञ्जेल  बाच्ने  अब

घरमा  छैन  केही  पनि,  कता  खोज्न  जाने  अब

अैंचो  पैंचो  अर्म  पर्म,  भयो  सम्झनामा  मात्र

मनभरी  पीडा  मात्रै,  किन  आयो  नयाँ  वर्ष  ।।

सारा  विश्व  कोलाहल,  छैन  शान्ति  कतैपनि

औषधिको  आशामा,  रुँदै  रुँदै  बसौं  कति

धर्ती  माता  थला  परिन्,  केको  कसलाई  हर्ष

मानवकै  सेवा  अव,  मनाउन्न  नयाँ  वर्ष  ।।

विश्व  बन्धुत्व  जागेर,  शान्ति  दीप  बल्नुपर्छ

बसुधैव  कुटुम्बकम्,  जताततै  पुग्नुपर्छ 

कोरोना  नास्  भएपछि,  विश्वमै  आउँथ्यो  हर्ष

देशको  विकास  गर्दै,  मनाऔंला  नयाँ  वर्ष  ।।

नारायण  सापकोटा

nsap513@gmail.com

होली  भिजन  पब्लिक  स्कुल

भरतपुर    चितवन